शुक्रवार, 22 अक्तूबर 2010

घांघू के वीर शहीद लक्खूसिंह राठौड़

31 अगस्त 1989 का दिन। श्रीलंका की धरती। समय सुबह के 10 बजे। भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पहल पर श्रीलंका भेजी गईशांति सेना का एक कमांडिंग ऑफिसर अपनी छुट्टियां बीताने घर जारहा था। सिपाहियों का एक दल उसे छोड़ने के लिए साथ था। अचानकएक तरफ की दीवार के पीछे से धड़ाधड़ गोलीबारी शुरू हो गई। चूंकिसभी सैनिक पैदल थे और खुले में थे, दूसरी तरफ लिट्टे के उग्रवादीदीवारों के पीछे। सैनिकों के पास बचाव का कोई मौका था। फिर भीसैनिकों ने साहस का परिचय देते हुए मुकाबला शुरू कर दिया। एकसैनिक जिसके पास रॉकेट लांचर था (यह भारी और ताकतवर हथियार अत्यंत मजबूत कद-काठी वाले जवान को ही दिया जाता है ), अपने कमांडिंग ऑफिसर और अन्य साथियों को बचाने के लिए सबसे आगेआया और उग्रवादियों ने उसका शरीर गोलियों से छलनी कर दिया।कर्तव्य-पथ पर जूझते इस वीर सैनिक ने भारत माता की जय बोलते हुए कर्तव्य पथ पर अपना जीवन पुष्पअर्पित कर दिया। इस दौरान दो अन्य जवान भी शहीद हुए, एक जवान का पांव काटना पड़ा।

इस वीर प्रसविनी भारत भूमि पर मातृभूमि के लिए मर-मिटने वालों की शहादत पर मातम नहीं मनाए जाते। चूरूजिले के गांव घांघू में जन्मे भारतीय सेना की पैराशूट रेजीमेंट के 10 पैरा कमांडो हवलदार लक्खूसिंह राठौड़ कीशहादत की कहानी सुनकर हरेक घांघूवासी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। अपने पति की बाट जौहती वीरांगना की आंखों ने अपने कंत की देशभक्ति और साहस को नमन किया लेकिन दो नन्हे-नन्हे अबोध बालक उस समय तोसमझ भी नहीं पाए कि उनका पिता सदा-सदा के लिए इस मातृभूमि के काम गया।
मजबूत कद-काठी, गठीले बदन और खुले दिल के मालिक
लक्खूसिंह का जन्म ऎतिहासिक गांव घांघू के गढ मेंबैरीसाल सिंह के यहां हुआ। घुड़वसवारी में दक्ष तथा शतरंत के शौकीन लक्खूसिंह ने अपनी नौकरी के दौरान हीनिशानेबाजी में राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धा में पुरस्कार हासिल किया था। मरहूम राजीव गांधी के प्रधानमंत्री कार्यकालके दौरान लक्खूसिंह उनके अंगरक्षक रहे और 1992 में रूसी राष्ट्रपति मिखाईल गोर्बाचोव के भारत दौरे में वे उनकेअंगरक्षक रहे। इस नौजवान ने बड़े ही अदब और शान के साथ नौकरी की और महज 32 साल की आयु में इसीअदब के साथ हम सबको छोड़कर इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अपना नाम लिखवा कर चल दिए। गांव के बुजुर्गों, नौजवानों और बच्चों के समान रूप से चहेते रहे लक्खूसिंह की जिंदादिली को आज भी घांघू के लोग खासी शिददतसे याद करते हैं। ऎसे जिंदादिल इंसान को, उसकी वतनपरस्ती को, उसकी शहादत को कोटि-कोटि नमन।

बुधवार, 22 सितंबर 2010

लगातार बारिश से पानी भरा

घांघू, 22 सितंबर। क्षेत्र के घांघू, ढाढर, लाखाऊ, दांदू, लादड़िया आदि गांवों में पिछले दो दिनों में अच्छी बारिश हुई, जिससे खरीफ की फसल को खासा नुकसान हुआ है। बुधवार दिनभर रुक-रुककर बरसात होती रही। घांघू में लगातार बारिश के चलते वार्ड दो में पानी भर जाने से लोगों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़क पर पानी भरने से राहगीरों व वाहनों को दिक्कत हुई, वहीं वार्ड में स्थित ग्रामीणों को घर से निकलने में ही कठिनाई का सामना करना पड़ा। वार्ड में स्थित तीन राजकीय स्कूलों में विद्यार्थियों व अध्यापकों को भी परेशानी रही। पानी निकासी के लिए बना नाला वार्ड दो में टूटा हुआ है, जिसके चलते सारे गांव का पानी वार्ड दो में आकर इकट्टा हो जाता है।

बिजली गिरने से ऊंटनी की मौत

घांघू, 22 सितंबर। नजदीकी गांव लादड़िया में मंगलवार शाम 21 सितम्बर को आकाशीय बिजली गिरने से एक ऊंटनी की मौत हो गई।
ग्रामीणों ने बताया कि बीपीएल चयनित रेखाराम मेघवाल खेत में ढाणी बनाकर रह रहा था। मंगलवार शाम हो रही बारिश के बीच आकाशीय बिजली उसकी ऊंटनी पर गिरी, जिससे ऊंटनी की मौके पर ही मौत हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि रेखाराम दो दिन पहले ही गोगामेड़ी मेले से ऊंटनी खरीद कर लाया था।

शुक्रवार, 7 मई 2010

ग्रामीणों के स्वास्थ्य का ख्याल रखें चिकित्साकर्मी- सातड़ा

पंचायत समिति प्रधान रणजीत सातड़ा ने दांदू में उप स्वास्थ्य केंद्र भवन का उद्घाटन किया
घांघू, 07 मई। नजदीकी गांव दांदू में नवनिर्मित राजकीय उप स्वास्थ्य केंद्र भवन का उद्घाटन पंचायत समिति प्रधान रणजीत सातड़ा ने किया। इस मौके पर सातड़ा ने कहा कि चिकित्साकर्मी अपने दायित्वों का पूरी जिम्मेदारी के साथ निर्वहन कर ग्रामीण जनता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें क्योंकि स्वास्थ्य सेवाओं की जरा सी लापरवाही से बड़ा नुकसान हो सकता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण स्वास्थ्य को लेकर कटिबद्ध है तथा इस संबंध में किसी भी सुविधा की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के संबंध में जनता को भी जागरुक होना चाहिए तथा खान-पान में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा जागरुक रहकर भी हम बीमारियों से काफी हद तक बच सकते हैं। पंचायत समिति सदस्य युनुस अली की अध्यक्षता में आयोजित समारोह के विशिष्ट अतिथि ब्लॉक सीएमओ डॉ मनोज शर्मा थे। कार्यक्रम संयोजक डॉ जगदीश सिंह भाटी ने बताया कि पांच लाख रुपए की लागत से निर्मित इस भवन का निर्माण राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत किया गया है। कार्यक्रम का संचालन सफी मोहम्मद गांधी ने किया। कार्यक्रम में डॉ सुनील जांदू, सरपंच लिखमाराम मेघवाल, पूर्व सरपंच प्रेमसिंह गोदारा, सुधीर कस्वां, सुमन गोदारा सहित अनेक गणमान्यजन मौजूद थे।
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गुरुवार, 25 मार्च 2010

‘जीण माता’ के चमत्कार देख अभिभूत हुए श्रद्धालु

घांघू, 25 मार्च। स्थानीय जीण माता मंदिर में प्रोजेक्टर के जरिए बड़े पर्दे पर फिल्म ‘जय जीण माता’ देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रद्धालु उमड़े। लोकदेवी जीण और भाई हर्षनाथ के स्नेह और बलिदान की अनूठी ऎतिहासिक कथा पर आधारित इस फिल्म के मार्मिक द्श्यों पर ग्रामीण दर्शक भावविभोर हुए बिना नहीं रह सके। जीणमाता के चमत्कारों ने ग्रामीणों को अभिभूत कर दिया।
आयोजन समिति के खींवसिंह राठौड़ ने बताया कि जीण मंदिर में नवरात्रा स्थापना के साथ ही शुरू हुए विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का समापन बुधवार रात्रि को इस फिल्म ‘जय जीण माता’ के प्रदर्शन से हुआ। इस मौके पर प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रदर्शित सुपर हिट राजस्थानी धार्मिक फिल्म ‘नानी बाई को मायरो’ को भी ग्रामीणों ने खूब पसंद किया। उन्होंने बताया कि नवरात्रा के दौरान प्रतिदिन रात्रि को रामानंद सागर कृत ‘रामायण’ का प्रदर्शन बड़े पर्दे पर किया गया।
उन्होंने बताया कि नवरात्रा के दौरान बड़ी संख्या में देशभर से श्रद्धालुओं ने जीण-हर्ष की जन्मभूमि घांघू आकर मां जीण के दर्शन किए और मनौती मांगी। इस दौरान अखिल भारतीय श्री जीण माता सेवा संघ सूरत की ओर से सामूहिक कन्या भोज कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।
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रविवार, 14 मार्च 2010

घांघू सरपंच लिखमाराम के खिलाफ चुनाव याचिका

नाम निर्देशन पत्र में तथ्य छुपाने का आरोप,
चल रहा है कर्मचारी नियुक्ति का मामला
चूरू, 15 मार्च। सत्ताईस साल पहले ग्राम पंचायत द्वारा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की अवैध नियुक्ति का मामला घांघू के नवनिर्वाचित सरपंच लिखमाराम मेघवाल के लिए खासी मुश्किलें खड़ी कर सकता है। इसी मामले को लेकर घांघू सरपंच लिखमाराम मेघवाल के खिलाफ चुनाव याचिका दाखिल कर नाम निर्देशन पत्र में तथ्य छुपाए जाने का आरोप लगाया गया है।
हाल ही में संपन्न पंचायती राज चुनाव में उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी रावताराम मेघवाल द्वारा जिला न्यायालय में अपने वकील रामलाल कस्वां व विजय कस्वां के जरिए दायर इस निर्वाचन याचिका में कहा गया है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को ग्राम पंचायत में नियम विरूद्ध नियुक्ति देेने के मामले में राज्य सरकार के पत्र क्रमांक एफ 13 (2) विधि/परा/एएबी/चूरू/2006/1109/जयपुर दिनांक 02.03.2006 एवं एफ 4 ( ) परावि के अनुसरण में पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 11 के तहत जिला परिषद चूरू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने अपने 25 मई 2006 के अपने पत्र क्रमांक जिप/विधि/जांच/06/दिनांक 25.05.06 द्वारा जिला कलक्टर के अनुमोदन के बाद उपखंड अधिकारी चूरू को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। जांच के बाद उपखंड अधिकारी एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा 13.07.07 को लिखमाराम को पंचायती राज अधिनियम की धारा 111 के तहत दोषी करार दिया जाकर ग्राम पंचायत को इस मामले में हुई आर्थिक हानि 78152 रुपए की राशि दोषी लिखमाराम से वसूल किए जाने के आदेश दिए गए थे। इस प्रकरण की राज्य सरकार को की गई अपील के बाद पुनः जांच में भी मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा 08.02.2008 को पूर्व के फैसले को बहाल करते हुए लिखमाराम पर पुनः उक्त राशि की वसूली कायम रखी गई।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी के वसूली आदेश की पालना में राशि निर्धारित समय में जमा नहीं करवाये जाने पर अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी चूरू द्वारा 18 फरवरी 2008 को जारी नोटिस में निर्धारित समय में राशि जमा नहीं कराये जाने पर लिखमाराम की चल-अचल संपत्ति कुर्क किए जाने के संदर्भ में लिखा गया। इस पर लिखमाराम द्वारा प्रस्तुत याचिका पर माननीय उच्च न्यायालय जोधपुर द्वारा स्थगन आदेश दिया गया जिसमें 18 फरवरी 2008 के कुर्की आदेश पर रोक लगा दी गई। इस बारे में याचिकाकर्ता का कहना है कि माननीय हाईकोर्ट के स्थगनादेश से 18 फरवरी 2008 के कुर्की आदेश पर अवश्य रोक लगी लेकिन मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा 13 जुलाई 2007 एवं 8 फरवरी 2008 के लिखमाराम को दोषसिद्ध करार दिए जाने एवं बकाया राशि के संबंध में माननीय न्यायालय द्वार कोई निर्णय नहीं दिया गया है तथा बकाया राशि नाम निर्देशन के समय व वर्तमान में भी लिखमाराम पर कायम है।
याचिका में कहा गया है कि उक्त दोषसिद्धि को नाम निर्देशन पत्र के प्रारूप 4 घ एवं उपाबंध 01 में उल्लेख नहीं कर तथ्य छुपाए गए हैं तथा पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 19 के तहत निरर्हित (अपात्र) होते हुए भी लिखमाराम ने चुनाव लड़ा, जबकि अधिनियम के मुताबिक चुनाव लड़ने वाले को बकाया राशि नाम-निर्देशन पत्र दाखिल करने से पहले संदत्त करना आवश्यक है।
इस मामले में निर्वाचित सरपंच लिखमाराम के अलावा एक अन्य प्रत्याशी बलराम नायक, जिला निर्वाचन अधिकारी चूरू व चुनाव में नियुक्त रिटर्निंग अधिकारी ग्राम पंचायत घांघू को पक्षकार बनाया गया है।

यह है मामला ः- एक अक्टूबर 1982 को ग्राम पंचायत घांघू के तत्कालीन सरपंच लिखमाराम ने गिरधारी लाल नामक व्यक्ति को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में नियुक्त कर दिया था। 11 सितंबर 1995 को तत्कालीन सरपंच ने इस नियुक्ति को अवैध मानते हुए गिरधारी लाल को नौकरी से हटा दिया। इस निर्णय को गिरधारी ने श्रम न्यायालय में चुनौती दी, जिस पर श्रम न्यायालय ने 20 जुलाई 2002 को कर्मचारी के पक्ष में अवार्ड पारित कर दिया गया। आदेश की पालना में कर्मचारी को पारित राशि का भुगतान नहीं किए जाने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पहले पंचायत समिति की जीप तथा बाद में 05 जनवरी 2005 को पंचायत भवन घांघू को कुर्क करने के आदेश दिए। इस पर ग्राम पंचायत की ओर से दायर याचिका पर कर्क आदेश पर एकबारगी स्थगन मिला लेकिन शीघ्र ही स्थगनादेश को निरस्त कर दिया गया। इस पर ग्राम पंचायत द्वारा पुनः उच्च न्यायालय में अपील की गई, जिस पर पंचायत को दो सप्ताह की मोहलत मिली। इसी बीच पंचायत द्वारा कर्मचारी के पक्ष में पारित राशि जमा करवा दी गई लेकिन पंचायती राज विभाग जयपुर के उप विधि परामर्शी द्वारा नियुक्ति को अवैध करार दिया जाकर ग्राम पंचायत को हुई हानि की राशि गलत नियुक्ति के लिए जिम्मेदार दोषी पदाधिकारी से वसूल करने के आदेश दिए गए थे।
चुनाव याचिका की पंरपरा - ग्राम पंचायत घांघू में चुनाव याचिका एक परंपरा सी बनता जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले पंचायती राज चुनाव के बाद भी निर्वाचित सरपंच नाथी देवी के खिलाफ पराजित निकटतम प्रत्याशी भगवानी देवी पत्नी लिखमाराम मेघवाल द्वारा चुनाव याचिका दायर की गई थी, जिसे बाद में खारिज कर दिया गया।
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शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2010

पंचायत चुनाव प्रत्याशियों का स्वागत


घांघू, 19 फरवरी। नजदीकी गांव दांदू में आयोजित एक कार्यक्रम में ग्रामीणों ने हाल ही में संपन्न हुए पंचायती राज चुनाव में पराजित सरपंच पद के प्रत्याशी व पूर्व सरपंच रावताराम मेघवाल तथा पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में पराजित भाजपा प्रत्याशी मनीर खां का स्वागत किया। ग्रामीणों ने पराजित सरपंच प्रत्याशी को इक्कीस हजार रुपए भेंट किए।
इस मौके पर संबोधित करते हुए पूर्व सरंपंच प्रेमसिंह गोदारा ने कहा कि चुनाव में हार-जीत सामान्य प्रक्रिया है। किसी भी चुनाव में एक ही प्रत्याशी को विजय मिलती है लेकिन हारे हुए प्रत्याशी भी कमोबेश जनता का प्रतिनिधित्व किसी न किसी रूप मे करते ही हैं। मन में यदि जनसेवा का संकल्प हो तो हारे हुए प्रत्याशी भी अधिक उपयोगी साबित हो सकते हैंं। भाजपा कार्यकर्ता महावीर सिंह नेहरा ने कहा कि जनता के दिलों पर शासन वे करते हैं जो जनता के दुख-सुख में भागीदार रहते हैं। उन्होंने कहा कि सेवा किसी पद की मोहताज नहीं होती।
कार्यक्रम में ग्राम सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष परमेश्वर लाल दर्जी, गोरधन लाल मेघवाल, हीरालाल शास्त्री, भंवर सिंह झाझड़िया, कानाराम मीणा, खेमाराम बाबल, अर्जुन राम बाबल, बच्छूराम मेघवाल, मालाराम कुम्हार, यासीन खां सहित ग्रामीण मौजूद थे।
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गुरुवार, 18 फ़रवरी 2010

हार व जीत एक ही सिक्के के दो पहलू

-राणासर में चैलेंजर कप क्रिकेट प्रतियोगिता के उद्घाटन मैच में चूरू के खिलाड़ियों ने घांघू को 18 रन से हराया
घांघू,18 फरवरी। नजदीकी गांव राणासर के बालिका विद्यालय खेल मैदान में शिव क्रिकेट क्लब की ओर से आयोजित चैलेंजर कप प्रतियोगिता का उद्घाटनपंचायत समिति सदस्य यूनुस अली ने फीता काटकर किया।
पूर्व सरंपच चिमनाराम कारेल की अध्यक्षता में आयोजित उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए यूनुस अली ने कहा कि हार व जीत एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने कहा कि जीत पर अभिमान व हार पर मायूसी नहीं होनी चाहिए। जीत व हार दोनों से ही बेहतर प्रदर्शन की प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में क्रिकेट के प्रति बढते रूझान के प्रति हर्ष जताया।
विशिष्ट अतिथि सफी मोहम्मद गांधी ने कहा कि इस प्रकार की खेल प्रतियोगिताओं से ग्रामीण प्रतिभाएं सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि खेल मनुष्य के सर्वांगीण विकास के साधन हैं। इससे युवाओं में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और प्रत्येक स्थिति का डटकर मुकाबला करने की शक्ति का विकास होता है। खेल के ये अनुभव जिंदगी में हमेशा काम आते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण युवाओं को अपनी सकारात्मक शक्ति को रचनात्मक कार्याें में लगाना चाहिए।
इस मौके पर मुमताज खां, सुलेमान खां ने भी विचार व्यक्त किए। समारोह में परमेश्वरलाल, विनोद शर्मा, क्लब सचिव मुकेश कड़वासरा, मो. शाहिद अनवरी, बरकत खां, ज्ञानाराम फगेड़िया, महेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में खिलाड़ी, दर्शक व ग्रामीण मौजूद थे। क्लब अध्यक्ष मो. हुसैन ने आभार जताया। संचालन सुरेश मीणा ने किया।
प्रतियोगिता के उद्घाटन मैच में चूरू की टीम ने घांघू को 18 रन से हराया। चूरू के खिलाड़ियों ने पहले खेलते हुए 97 रन बनाए। जवाब में घांघू की टीम 79 रनों पर ही सिमट गई।

शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

लिखमा राम सरपंच व पृथ्वी सिंह उप सरपंच निर्वाचित

घांघू, 01 फरवरी। ग्राम पंचायत घांघू में सोमवार को हुए उप सरपंच चुनाव में पृथ्वीसिंह को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।
जोनल मजिस्ट्रेट रेखाराम गोदारा ने बताया कि रविवार को हुए सरपंच चुनाव में लिखमाराम 562 मतों से विजयी हुए। लिखमाराम को 1995 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी रावताराम को 1433 मत मिले। उन्होंने बताया कि पंच के चुनाव में वार्ड संख्या 01 से राधा देवी 19 मतों से, वार्ड संख्या 02 से सोना 12 मतों से, वार्ड 12 से किस्तूरी 01 मत से तथा वार्ड 13 से सावित्राी 37 मतों से विजयी घोषित किए गए। निर्वाचित सरपंच, उप सरपंच व पंचों को रिटर्निंग ऑफिसर सत्य गोपाल ने शपथ दिलाई।
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शनिवार, 30 जनवरी 2010

घांघू सरपंच के लिए तीन प्रत्याशी मैदान में, 10 वार्ड पंच निर्विरोध निर्वाचित

घांघू, 30 जनवरी। ग्राम पंचायत घांघू के सरपंच पद के लिए शनिवार को भरे गए पांच नामांकनों में से दो के अंतिम समय तक नाम वापस लेने के बाद अब तीन प्रत्याशी चुनाव मैदान में रह गए हैं जबकि 10 वार्ड पंच निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जाने के बाद पांच वार्डों के पंच पद के लिए 10 प्रत्याशी मैदान में डटे हुए हैं।
जोनल मजिस्ट्रेट रेखाराम गोदारा ने बताया कि शनिवार को सरपंच पद के लिए पांच प्रत्याशियों ने अपने नाम दाखिल किए, जिनमें से निर्धारित समय तक ओमप्रकाश व सुभाष द्वारा अपने नामांकन वापस ले लिए गए। अब सरपंच चुनाव के लिए बलराम, रावताराम व लिखमाराम मैदान में रह गए हैं।
उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत के सभी 15 वार्डों में से 10 वार्ड पंच एक ही चुनाव प्रत्याशी के मैदान में रहने से निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि वार्ड 04 से परमाराम, वार्ड 05 से जब्बार खां, वार्ड 06 से आमीना, वार्ड 07 से प्रमोद सेवदा, वार्ड 08 से चंदा देवी, वार्ड 9 से अर्जुुन सिंह, वार्ड 10 से पृथ्वी सिंह, वार्ड 11 से परमेश्वरी, वार्ड 14 से जगदीश व वार्ड 15 से चिमनाराम निर्विरोध पंच निर्वाचित हुए।
शेष पंाच वार्डों में दस प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। वार्ड एक में राधादेवी व सुमन, वार्ड दो में सोना व मोहरी, वार्ड तीन में भगवानाराम भादू व पोकरराम सिहाग, वार्ड 12 में परमेश्वरी व किस्तूरी तथा वार्ड 13 में सीमा कंवर व सावित्राी वार्ड पंच के लिए चुनाव मैदान में हैं।
रिटर्निंग अधिकारी सत्यगोपाल ने शनिवार को निर्विरोध निर्वाचित पंचों को शपथ दिलाई तथा एक फरवरी को उप सरपंच चुनाव के लिए आहूत होने वाली ग्राम पंचायत की प्रथम बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। सरपंच व पंच पदों के लिए मतदान रविवार को होगा।
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रविवार, 17 जनवरी 2010

सदियों का इतिहास समेटे है घांघू की धरती

चूरू से मलसीसर और टमकोर जाने वाली निजी बसों से घांघू उतर कर शायद ही किसी को यह महसूस हो कि महज 600-700 घरों की आबादी वाला यह गांव जिला मुख्यालय चूरू और जयपुर जैसे महानगर से भी पहले का सैकड़ों वर्षों का इतिहास अपने भीतर समेटे हुए है। गांव के संस्थापक राजा घंघरान की बेटी लोकदेवी जीण और पुत्रा हर्ष के अद्भुत स्नेह की कहानी भारतीय फिल्म नगरी बाॅलीवुड के फिल्मकारों को भी आकर्षित कर चुकी है।

इतिहासकारों की नजर से

एक हजार से भी अधिक साल पुराने इस गांव के सुनहरे अतीत पर यूं तो अनेक इतिहासकारों ने अपनी कलम चलाई है लेकिन इनमें कर्नल टाॅड, बांकीदास, ठाकुर हरनामसिंह, नैणसी, डाॅ दशरथ शर्मा, गोविंद अग्रवाल के नाम खासतौर पर शामिल है। क्याम खां रासो के मुताबिक, चाहुवान के चारों पुत्रों मुनि, अरिमुनि, जैपाल और मानिक में से मानिक के कुल में सुप्रसिद्ध चैहान सम्राट पृथ्वीराज पैदा हुआ जबकि मुनि के वंश में भोपालराय, कलहलंग के बाद घंघरान पैदा हुआ जिसने बाद में घांघू की स्थापना की।
गोविंद अग्रवाल कृत चूरू मंडल का शोधपूर्ण इतिहास के मुताबिक, एक बार राजा घंघरान शिकार खेलने गया। राजा मृग का पीछा करते हुए लौहगिरि( वर्तमान लोहार्गल) तक जा पहुंचा जहां मृग अदृश्य हो गया। राजा वृक्ष के नीचे विश्राम करने लगा। निकट ही एक सरोवर था जिसमे स्नान करने के लिए चार सुंदरियां आईं। वस्त्रा उतारकर उन्होंने सरोवर में प्रवेश किया। राजा ने उनके वस्त्रा उठा लिये और इसी शर्त पर लौटाए कि उन चारों में से किसी एक को राजा के साथ विवाह करना होगा। मजबूरन, सबसे छोटी ने विवाह की स्वीकृति दे दी। तब राजा ने उसके साथ विवाह किया।

लोकदेवी जीण और हर्ष की जन्मभूमि

राजा को अपनी पहली रानी से दो पुत्रा हर्ष व हरकरण तथा एक पुत्राी जीण प्राप्त हुई। ज्येष्ठ पुत्रा होने के नाते हालांकि हर्ष ही राज्य का उत्तराधिकारी था लेकिन नई रानी के रूप में आसक्त राजा ने उससे उत्पन्न पुत्रा कन्ह को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। संभवतः इन्हीं उपेक्षाओं ने हर्ष और जीण के मन में वैराग्य को जन्म दिया। दोनों ने घर से निकलकर सीकर के निकट तपस्या की और आज दोनों लोकदेव रूप में जन-जन में पूज्य हैं।

गोगाजी व कायमखां

इसी प्रकार लोकदेव गोगाजी और क्यामखानी समाज के संस्थापक कायम खां भी घांघू से संबंधित हैं। घंघरान के ही वंश में आगे चलकर अमरा के पुत्रा जेवर के घर लोकदेवता गोगाजी का जन्म जेवर की तत्कालीन राजधानी ददरेवा में हुआ। बाद में गोगाजी ददरेवा के राजा बने। गोगाजी ने विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी के खिलाफ लड़ते हुए अपने पुत्रों, संबंधियों और सैनिकों सहित वीर गति प्राप्त की। इसी वंश के राजा मोटेराव के समय ददरेवा पर फिरोज तुगलक का आक्रमण हुआ और उसने मोटेराय के चार पुत्रों में से तीन को जबरन मुसलमान बना लिया। मोटेराय के सबसे बड़े बेटे के नाम करमचंद था जिसका धर्म परिवर्तन पर कायम खां रखा गया और कायम खां के वंशज कायमखानी कहलाए।

ऐतिहासिक गढ़ और छतरी-
हालांकि हजारों वर्षों पूर्व के सुनहरे अतीत के चिन्ह तो घांघू में कहीं मौजूद नजर नहीं आते लेकिन लगभग 350 साल पहले बना ऐतिहासिक गढ और संुदरदासजी की छतरी आज भी गांव में मौजूद है। गांव में जीणमाता, हनुमानजी, करणीमाता, कामाख्या देवी, गोगाजी, शीतला माता सहित 7-8 देवी देवताओं के मंदिर हैं।

वर्तमान में घांघू

एक धर्मशाला तथा जलदाय विभाग के पंाच कुंए हैं जिनसे घर-घर जलापूर्ति होती है। पिछले वर्षाें में जलस्तर काफी गिरा है और पानी की सबसे बड़ी समस्या इसका खारापन है। स्थानीय राजकीय संस्थानों में एक वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, एक बालिका माध्यमिक विद्यालय, एक उच्च प्राथमिक विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र, पशु चिकित्सा केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, दूरभाष केंद्र, डाकघर, दो बैंक, 33 के वी विद्युत ग्रिड सब स्टेशन हैं। तीन निजी स्कूलें भी हैं। ग्राम पंचायत घांघू के अंतर्गत घांघू, बास जैसे का, दांदू व बास जसवंतपुरा आते हैं। वर्ष 2001 की जनगणना के मुताबिक ग्राम की जनसंख्या 3 हजार 654 है। श्रीमती नाथीदेवी गांव की सरपंच हैं। निजी बसें एवं साधन पर्याप्त हैं लेकिन लोगों को राज्य पथ परिवहन निगम की बसें नहीं चलने का मलाल है।

प्रतिष्ठित व्यक्ति-
ग्राम के सर्वाधिक प्रतिष्ठित व्यक्तियों में पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह राठौड़, बंशीधर शर्मा, डीजी जेल पश्चिमी बंगाल, मो. हनीफ, डाॅ मुमताज अली, एथलीट बैंकर्स हरफूलसिंह राहड़, पवन अग्रवाल, ठा. भींवसिंह राठौड़ आदि हैं। राजनीतिक रूप से श्री महावीर सिंह नेहरा, ग्राम सेवा सहकारी समिति अध्यक्ष श्री परमेश्वर लाल दर्जी, लिखमाराम मेघवाल, जयप्रकाश शर्मा, चंद्राराम गुरी आदि सक्रिय हैं। बंशीधर शर्मा द्वारा पश्चिमी बंगाल में किए गए जेल सुधारों को विश्वस्तर पर सराहना मिली है। यहां के लक्खूसिंह राठौड़ श्रीलंका भेजी गई शांति सेना में शहीद होकर नाम अमर कर चुके हैं। श्रीमती नाथी देवी नेहरा वर्तमान में घांघू ग्राम पंचायत की सरपंच हैं।

सद्भाव
गांव की हिंदु मुस्लिम आबादी में अधिक अंतर नहीं फिर भी यहां लोगों के सांप्रदायिक सद्भाव की जितनी प्रशंसा की जाए, कम है। गांव में 60-70 दुकानें हैं, जिनसे रोजमर्रा के सामान की पूर्ति हो जाती है। ग्राम में शिक्षा का स्तर काफी बढ़ा है और लोग इस बात के लिए सचेष्ट होने लगे हैं कि उनके बच्चों को पढने के लिए अच्छा वातावरण और विद्यालय मिले। गत वर्षों में अकाल ने लोगों की कमर तोड़ी है लेकिन ग्रामीण सुखद भविष्य के लिए आशान्वित नजर आते हैं।
गांव कई रूटों से सड़क से जुड़ा हुआ है लेकिन ग्रामीणों का मानना है कि यदि दक्षिण में बिसाऊ तक सड़क और बन जाए तो लोगों को खासी सुविधाएं मिल जाएं।

बेहतर भविष्य की आशाएं

ग्राम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी जय जीण माता फिल्म और धारावाहिक के निर्माण ने गांव को नई पहचान दी है। बहरहाल, कुछेक छुटपुट चीजों को दरकिनार कर दिया जाए तो गांव काफी अच्छी स्थिति में है। गांव का इतिहास और विकास दोनों ही इसकी पहचान हैं और वर्तमान स्थिति को देखते हुए भविष्य भी उज्जवल नजर आता है।

पुरातात्विक महत्व हो उजागर-
दसवीं शताब्दी में बसा गांव घांघू ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। इसी काल के हर्ष, रैवासा और जीणमाता अपने पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व के लिए खासे प्रसिद्ध हैं। हर्षनाथ से मिली पुरातात्विक सामग्री इतिहासवेत्ताओं के लिए खासी महत्वपूर्ण है। हर्ष और जीणमाता गांव से तो घांघू एकदम सीधे-सीधे संबंधित है। इसलिए यहां भी अगर पुरातत्वविदों की नजर पड़े और खुदाई की जाए तो संभव है कि कम से कम दसवीं शताब्दी के इतिहास से जुड़े काफी चीजें यहां मिल सकती हैं। इसी दृष्टि से हुई उपेक्षा के चलते गांव का समूचा गौरव मानो दफन होकर रह गया है। ग्रामीणों का मानना है कि सरकार को अपनी हैरिटेज योजनाओं में घांघू गांव को शामिल करना चाहिए तथा अगर यहां पुरातात्विक दृष्टिकोण से खुदाई हो जाए तो निश्चित रूप से दसवीं शताब्दी और संभवतः उससे भी पुराने इतिहास में कुछ नए पन्ने जुड़ सकते हैं।