रविवार, 14 मार्च 2010

घांघू सरपंच लिखमाराम के खिलाफ चुनाव याचिका

नाम निर्देशन पत्र में तथ्य छुपाने का आरोप,
चल रहा है कर्मचारी नियुक्ति का मामला
चूरू, 15 मार्च। सत्ताईस साल पहले ग्राम पंचायत द्वारा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की अवैध नियुक्ति का मामला घांघू के नवनिर्वाचित सरपंच लिखमाराम मेघवाल के लिए खासी मुश्किलें खड़ी कर सकता है। इसी मामले को लेकर घांघू सरपंच लिखमाराम मेघवाल के खिलाफ चुनाव याचिका दाखिल कर नाम निर्देशन पत्र में तथ्य छुपाए जाने का आरोप लगाया गया है।
हाल ही में संपन्न पंचायती राज चुनाव में उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी रावताराम मेघवाल द्वारा जिला न्यायालय में अपने वकील रामलाल कस्वां व विजय कस्वां के जरिए दायर इस निर्वाचन याचिका में कहा गया है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को ग्राम पंचायत में नियम विरूद्ध नियुक्ति देेने के मामले में राज्य सरकार के पत्र क्रमांक एफ 13 (2) विधि/परा/एएबी/चूरू/2006/1109/जयपुर दिनांक 02.03.2006 एवं एफ 4 ( ) परावि के अनुसरण में पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 11 के तहत जिला परिषद चूरू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने अपने 25 मई 2006 के अपने पत्र क्रमांक जिप/विधि/जांच/06/दिनांक 25.05.06 द्वारा जिला कलक्टर के अनुमोदन के बाद उपखंड अधिकारी चूरू को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। जांच के बाद उपखंड अधिकारी एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा 13.07.07 को लिखमाराम को पंचायती राज अधिनियम की धारा 111 के तहत दोषी करार दिया जाकर ग्राम पंचायत को इस मामले में हुई आर्थिक हानि 78152 रुपए की राशि दोषी लिखमाराम से वसूल किए जाने के आदेश दिए गए थे। इस प्रकरण की राज्य सरकार को की गई अपील के बाद पुनः जांच में भी मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा 08.02.2008 को पूर्व के फैसले को बहाल करते हुए लिखमाराम पर पुनः उक्त राशि की वसूली कायम रखी गई।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी के वसूली आदेश की पालना में राशि निर्धारित समय में जमा नहीं करवाये जाने पर अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी चूरू द्वारा 18 फरवरी 2008 को जारी नोटिस में निर्धारित समय में राशि जमा नहीं कराये जाने पर लिखमाराम की चल-अचल संपत्ति कुर्क किए जाने के संदर्भ में लिखा गया। इस पर लिखमाराम द्वारा प्रस्तुत याचिका पर माननीय उच्च न्यायालय जोधपुर द्वारा स्थगन आदेश दिया गया जिसमें 18 फरवरी 2008 के कुर्की आदेश पर रोक लगा दी गई। इस बारे में याचिकाकर्ता का कहना है कि माननीय हाईकोर्ट के स्थगनादेश से 18 फरवरी 2008 के कुर्की आदेश पर अवश्य रोक लगी लेकिन मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा 13 जुलाई 2007 एवं 8 फरवरी 2008 के लिखमाराम को दोषसिद्ध करार दिए जाने एवं बकाया राशि के संबंध में माननीय न्यायालय द्वार कोई निर्णय नहीं दिया गया है तथा बकाया राशि नाम निर्देशन के समय व वर्तमान में भी लिखमाराम पर कायम है।
याचिका में कहा गया है कि उक्त दोषसिद्धि को नाम निर्देशन पत्र के प्रारूप 4 घ एवं उपाबंध 01 में उल्लेख नहीं कर तथ्य छुपाए गए हैं तथा पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 19 के तहत निरर्हित (अपात्र) होते हुए भी लिखमाराम ने चुनाव लड़ा, जबकि अधिनियम के मुताबिक चुनाव लड़ने वाले को बकाया राशि नाम-निर्देशन पत्र दाखिल करने से पहले संदत्त करना आवश्यक है।
इस मामले में निर्वाचित सरपंच लिखमाराम के अलावा एक अन्य प्रत्याशी बलराम नायक, जिला निर्वाचन अधिकारी चूरू व चुनाव में नियुक्त रिटर्निंग अधिकारी ग्राम पंचायत घांघू को पक्षकार बनाया गया है।

यह है मामला ः- एक अक्टूबर 1982 को ग्राम पंचायत घांघू के तत्कालीन सरपंच लिखमाराम ने गिरधारी लाल नामक व्यक्ति को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में नियुक्त कर दिया था। 11 सितंबर 1995 को तत्कालीन सरपंच ने इस नियुक्ति को अवैध मानते हुए गिरधारी लाल को नौकरी से हटा दिया। इस निर्णय को गिरधारी ने श्रम न्यायालय में चुनौती दी, जिस पर श्रम न्यायालय ने 20 जुलाई 2002 को कर्मचारी के पक्ष में अवार्ड पारित कर दिया गया। आदेश की पालना में कर्मचारी को पारित राशि का भुगतान नहीं किए जाने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पहले पंचायत समिति की जीप तथा बाद में 05 जनवरी 2005 को पंचायत भवन घांघू को कुर्क करने के आदेश दिए। इस पर ग्राम पंचायत की ओर से दायर याचिका पर कर्क आदेश पर एकबारगी स्थगन मिला लेकिन शीघ्र ही स्थगनादेश को निरस्त कर दिया गया। इस पर ग्राम पंचायत द्वारा पुनः उच्च न्यायालय में अपील की गई, जिस पर पंचायत को दो सप्ताह की मोहलत मिली। इसी बीच पंचायत द्वारा कर्मचारी के पक्ष में पारित राशि जमा करवा दी गई लेकिन पंचायती राज विभाग जयपुर के उप विधि परामर्शी द्वारा नियुक्ति को अवैध करार दिया जाकर ग्राम पंचायत को हुई हानि की राशि गलत नियुक्ति के लिए जिम्मेदार दोषी पदाधिकारी से वसूल करने के आदेश दिए गए थे।
चुनाव याचिका की पंरपरा - ग्राम पंचायत घांघू में चुनाव याचिका एक परंपरा सी बनता जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले पंचायती राज चुनाव के बाद भी निर्वाचित सरपंच नाथी देवी के खिलाफ पराजित निकटतम प्रत्याशी भगवानी देवी पत्नी लिखमाराम मेघवाल द्वारा चुनाव याचिका दायर की गई थी, जिसे बाद में खारिज कर दिया गया।
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1 टिप्पणी:

  1. घांघू डॉट कॉम नाम दे ही दिया तो पक्ष-विपक्ष दोनों पहलुओं को साथ लेकर चलेगें तो सार्थकता होगी।

    भाई पंचायत राज परिणाम, विजेता बंधुओं का स्‍वागत, उनकी भावी योजनाएं आदि भी विषय हो सकते हैं,

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